Friday, June 5, 2009

ऊळीचना रहा था फितरत मे

हो रत मे हो या निरत मे
ऊळीचना रहा था फितरत मे
समेट्ते रहे रात भर सेहरा को हम
पहलु से रिस गया वो पल भर मे
तुझ से पहले ही कोई कह गया था
जो तु समझ सका जिन्दगी भर मे
अपने बारे मे :कमाने का जुगाड इव्हेन्ट प्रोडॆक्शन पेशॆ से आट्रिस्ट सेट डिजाईनर law student
कई बार दुनिया के गाव बसाये ताजमहल भी मिनारे भी स्टाल लागाये देश मे भी बाहर भी
बचपन मे कई अख्बार बनाये ये भी जाना बनावाने वालो कितने बनाये। ये भी देखा
ब्लोग लिखना बस अभि शुरु किया ........कयोकि दिमाग की अलमारी मे रोज कुछ रख लेता हु।
सोचता हु॥ दुनिया के मानीटर मे आपना डीस्प्ले चालु कर डालु कुछः आफ बीट भी हो जाएगा ।
विचारो के कीबोर्ड पर जब भी ENTER > करता हु । sfift दबाना पड्ता है फिर भी मालुम है।
गलतिया तो होगी ही ।
जिन्दगी का कीबोर्ड भी कोन समझ पाया है ,कभी अचानक POWER चला जाता है।
ups थोडा backup दे देता है। पर कब तक
फ़ाईल save कर लेता हु । पर विचार Ctrl s नही हो पाते वो delete हो जाते है ।
हमारा blog कोशिश है वेसी ही जेसे अन्धा भी सन्तुस्ठ हो ’की चलो टान्गे तो बच गई १
अगर सिर्फ़ टान्गे ही बचा ले तॊ ही बहुत

यमराज ले जा रहे थे आपने साथ
जो भोग चुके अपनी काठी को
राज,बाल,उद्वव, मिले बोले रुको
ले जाओ सिर्फ़ मराठी को.......